-युद्ध ने मिडिल ईस्ट से फलों के एक्सपोर्ट पर असर डाला
मुंबई। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध ने मिडिल ईस्ट से फलों के एक्सपोर्ट पर असर डाला है क्योंकि यह वेस्ट एशिया तक फैल गया है। केले के एक्सपोर्टर सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए हैं। केले के 1,500 से 1,750 कंटेनर अभी सप्लाई चेन के अलग-अलग स्टेज पर फंसे हुए हैं। शिपिंग लाइन और संबंधित अधिकारियों की ओर से जहाजों के रूट पर कोई साफ गाइडेंस नहीं मिलने की तस्वीर दिख रही है। अगर समय रहते कोई हल नहीं निकला, तो 700 करोड़ रुपये के केले के व्यापारी पर असर पडऩे का खतरा है। मुंबई से मिडिल ईस्ट के मार्केट में फल भेजे जाते हैं। सभी फलों के बड़ी संख्या में कंटेनर पोर्ट के बाहर ले जाए जाने का इंतज़ार कर रहे हैं।
200 कंटेनर में रखे अंगूर खराब होने का खतरा है
- -अंगूर के करीब 200 कंटेनर, यानी 2,600 टन माल, 9 खाड़ी देशों के पास समुद्र में फंसा हुआ है।
- -इस साल अंगूर के दाम चार गुना बढ़ गए हैं। इस वजह से भारी नुकसान का डर है, ऐसा स्टेट ग्रेप एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के राजाराम सांगले ने बताया।
- - ग्रेप एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ने यह भी मांग की है कि एपीईडीए हमारी मांगें केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के सामने रखे और हमारी मदद करे।
फल खराब होने की वजह से नुकसान का डर
- - क्योंकि केले खराब होने वाले होते हैं, इसलिए वे कटाई के बाद करीब 30-40 दिनों तक चलते हैं।
- - इसमें पैकिंग, इंटरनल ट्रांसपोर्ट, पोर्ट हैंडलिंग, समुद्री ट्रांसपोर्ट और एक्सपोर्ट करने वाले देश तक पहुंचना शामिल है।
- मार्च, अप्रैल और मई भारतीय केलों के लिए सबसे अच्छे एक्सपोर्ट सीजन हैं। इसमें 13 हजार से 15 हजार कंटेनर एक्सपोर्ट होते हैं।
फल एक्सपोर्ट करने वालों की मुश्किलें बढ़ीं
- - महाराष्ट्र में करीब 200 फल एक्सपोर्ट करने वाले हैं।
- - रूस और दूसरे हिस्सों से गुजऱने वाले समुद्री जहाजों पर $6,000 का वॉर सरचार्ज लगाया जा रहा है।
- -कई देशों ने कोल्ड स्टोरेज के लिए बिजली और एंकरिंग चार्ज बढ़ा दिए हैं।
रूट बदलने की पॉलिसी
एक्सपोर्ट करने वालों को जहाज के रूट बदलने की पॉलिसी के बारे में शिपिंग लाइन, पोर्ट अथॉरिटी और ट्रेड एसोसिएशन से तुरंत क्लैरिटी चाहिए। - प्रकाश जैन, नेचर वन फ्रेश प्रोड्यूस लिमिटेड।
खाड़ी में कुल 17 कंटेनर भेजे
हमने कलिंग की खाड़ी में कुल 17 कंटेनर भेजे। हालांकि, युद्ध के कारण कुल लागत बढऩे से व्यापारी सामान लेने को तैयार नहीं हैं। हमें सिंगापुर, मलेशिया, सिंगापुर, श्रीलंका जैसे देशों की एम्बेसी से बात करनी चाहिए और वहां फल एक्सपोर्ट के मौके देने चाहिए। - स्वप्ना जर्ग, ग्रो इंडिया एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट
