कृषि पुरस्कार: राज्य-स्तरीय कृषि पुरस्कारों के लिए आवेदन शुरू; किसानों को यह मौका नहीं छोडऩा चाहिए



मुंबई। राज्य के कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों में बेहतरीन काम करने वाले किसानों के लिए एक शानदार मौका उपलब्ध हुआ है। राज्य सरकार द्वारा दिए जाने वाले अलग-अलग प्रतिष्ठित कृषि पुरस्कारों के लिए आवेदन प्रक्रिया अब पूरी तरह से ऑनलाइन कर दी गई है। राज्य सरकार द्वारा कृषि और उससे जुड़े सेक्टर में शानदार काम करने वाले किसानों, ग्रुप और संस्थाओं को सम्मानित करने के लिए दिए जाने वाले अलग-अलग कृषि पुरस्कारों की प्रक्रिया अब पूरी तरह से डिजिटल कर दी गई है। जि़ला सुपरिंटेंडेंट ऑफ़ एग्रीकल्चर ऑफि़सर सुभाष साल्वे ने इच्छुक लोगों से साल 2025 से पुरस्कारों के लिए ऑनलाइन एप्लीकेशन जमा करने की अपील की है। 


महाराष्ट्र को कृषि उत्पादन में देश का सबसे आगे रहने वाला राज्य माना जाता है। हर साल, राज्य सरकार इस क्षेत्र में शानदार योगदान देने वाले किसानों, संस्थाओं और अधिकारियों को सम्मानित करने के लिए अलग-अलग प्रतिष्ठित कृषि पुरस्कार देती है। ये अवॉर्ड ज़्यादातर गवर्नर देते हैं। इनमें डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि रत्न, वसंतराव नाइक कृषि भूषण, जीजामाता कृषि भूषण, उद्यान पंडित, युवा शेतकरी पुरस्कार के साथ-साथ डॉ. वि_लराव विखे पाटिल कृषि सेवारत्न (कृषि पुरस्कार) जैसे जाने-माने अवॉर्ड शामिल हैं।


अब एप्लीकेशन प्रोसेस पूरी तरह से ऑनलाइन है


पहले, एग्रीकल्चरल अवॉर्ड के लिए प्रपोज़ल ऑफ़लाइन जमा करने पड़ते थे। इस वजह से, एप्लीकेंट को प्रिंटिंग, ज़ेरॉक्स, पोस्टेज और ट्रैवल पर बहुत खर्च करना पड़ता था। साथ ही, एडमिनिस्ट्रेशन को प्रपोज़ल को वेरिफ़ाई करने और इक_ा करने में बहुत समय लग रहा था। इस प्रॉब्लम को दूर करने के लिए, एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट ने अब एक अलग कंप्यूटर सिस्टम बनाया है, और प्रपोज़ल जमा करने से लेकर इवैल्यूएट करने और रिपोर्ट तैयार करने तक का पूरा प्रोसेस ऑनलाइन कर दिया गया है।


कहाँ और कैसे अप्लाई करें?

इंटरेस्ट करने वाले किसान या ऑर्गनाइज़ेशन एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट की ऑफि़शियल वेबसाइट पर जाकर अप्लाई कर सकते हैं। वेबसाइट: krishi.maharashtra.gov.in  यहां, 'कृषि पुरस्कार' टैब पर क्लिक करके और ज़रूरी जानकारी भरकर प्रपोज़ल सबमिट किया जा सकता है।


किसानों के लिए ऑनलाइन सिस्टम के फायदे


  • नए डिजिटल सिस्टम से किसानों को कई सुविधाएं मिलेंगी।
  • किसान बिना ऑफिस जाए घर बैठे अप्लाई कर सकेंगे।
  •  प्रिंटिंग, ज़ेरॉक्स, पोस्टेज और आने-जाने का खर्च काफी हद तक बचेगा।
  •  एक बार अपलोड होने के बाद डॉक्यूमेंट्स को दोबारा सबमिट करने की ज़रूरत नहीं होगी।
  •  एप्लीकेशन के मौजूदा स्टेज की जानकारी ऑनलाइन ट्रैक की जा सकेगी।

एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट ने साफ़ किया है कि इस सिस्टम से इंसानी दखल कम होगा और अवॉर्ड प्रोसेस में ट्रांसपेरेंसी और क्रेडिबिलिटी बढ़ेगी।


ज़्यादा से ज़्यादा किसानों को फायदा उठाना चाहिए

जि़ला सुपरिंटेंडेंट ऑफ़ एग्रीकल्चर ऑफिसर सुभाष साल्वे ने बीड जि़ले के एलिजिबल किसानों, ग्रुप्स और ऑर्गनाइज़ेशन्स से इस ऑनलाइन सुविधा का फ़ायदा उठाने और अपने प्रपोज़ल सबमिट करने की अपील की है। उन्होंने यह भी कहा कि कृषि के क्षेत्र में बेहतरीन काम करने वाली यूनिट्स के लिए राज्य स्तर पर सम्मान पाने का यह एक शानदार मौका है।

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