यूरोप और साउथ एशियाई देशों में अंगूर का एक्सपोर्ट आसानी से फिर से शुरू



यूरोप और साउथ एशियाई देशों में अंगूर का एक्सपोर्ट आसानी से फिर से शुरू...

नई दिल्ली। ईरान, इजऱाइल और अमेरिका के बीच शुरू हुए युद्ध की वजह से, जिले से खाड़ी देशों में केले, अंगूर, प्याज और चीनी का एक्सपोर्ट पूरी तरह से बंद हो गया है। केले के किसानों को सबसे ज़्यादा नुकसान हुआ है, एक्सपोर्टर्स का कहना है कि चार दिनों में कीमतें 1,000 रुपये प्रति क्विंटल तक गिर गई हैं। रमज़ान का महीना शुरू होते ही खाड़ी देशों में केले और दूसरे फलों की भारी डिमांड होती है, लेकिन युद्ध जैसे हालात की वजह से एक्सपोर्ट रुक गया है। इस बीच, जि़ले से यूरोप और साउथ एशिया में अंगूर के 450 कंटेनर एक्सपोर्ट किए गए हैं। ईरान, इजऱाइल और अमेरिका के बीच शुरू हुए युद्ध की वजह से जि़ले से एक्सपोर्ट पूरी तरह से रुक गया है। रमज़ान का महीना शुरू होते ही जि़ले से खाड़ी देशों में बड़ी मात्रा में केले, अनार और अंगूर एक्सपोर्ट किए जाते थे।

एक तरफ़ केले का एक्सपोर्ट रुक गया है, तो दूसरी तरफ़ केले के दाम में भी काफी गिरावट आने से किसान परेशान हैं। युद्ध से पहले, पिछले हफ़्ते केले के दाम 2,500 रुपये प्रति क्विंटल थे। लेकिन, अब 1,000 रुपये प्रति क्विंटल की कमी के कारण यह सिफऱ् 1,500 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा है। जलगांव, सोलापुर और कोल्हापुर जि़लों के बाद केले के एक्सपोर्ट में सांगली जि़ला दूसरे नंबर पर है। हर महीने 20 से 25 कंटेनर केले दुबई, अबू धाबी, सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत, कतर, यूनाइटेड अरब अमीरात, ओमान, इराक और ईरान जाते थे।


हालांकि, पिछले चार दिनों से खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध के कारण केले की कीमतों में कमी आई है। खाड़ी देशों में युद्ध का चीनी, प्याज़ और अंगूर उगाने वालों पर भी बड़ा असर पड़ेगा। चीनी मिल मालिकों ने कहा कि खाड़ी देशों को चीनी का एक्सपोर्ट भी रुक गया है। हालांकि युद्ध के कारण केला, प्याज़ और चीनी का एक्सपोर्ट रुक गया है, लेकिन यूरोप और साउथ एशिया में अंगूर का एक्सपोर्ट जारी है। 1 अप्रैल, 2025 से 2 मार्च, 2026 तक 450 कंटेनर से सात हज़ार 222 टन अंगूर इस देश में एक्सपोर्ट किए जा चुके हैं। एक्सपोर्टर्स ने बताया कि यूरोपियन देशों में एक्सपोर्ट अंगूर को 100 से 150 रुपये प्रति द्मद्द का भाव मिल रहा है।


यूरोप में अंगूर को अच्छा भाव

 ग्रेप ग्रोअर्स एसोसिएशन के रीजनल वाइस-प्रेसिडेंट मारुति चव्हाण ने बताया, खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध के कारण दुबई, अबू धाबी, सऊदी अरब और बहरीन को अंगूर का एक्सपोर्ट रुक गया है। लेकिन, यूरोप और साउथ एशिया में अंगूर का एक्सपोर्ट आसानी से जारी है।

 यहां काली कृष्णा और ज्योति को 125 से 150 रुपये प्रति द्मद्द का भाव मिल रहा है। हरे अंगूर को 20 से 120 रुपये प्रति किलो का भाव मिल रहा है। देश में भी अंगूर की अच्छी डिमांड होने के कारण उन्हें 90 से 100 रुपये का भाव मिल रहा है।

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