हरित खाद के उपयोग से मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने किसानों को किया जा रहा जागरूकः डॉ. संदीप शर्मा



ढैंचा, सनई एवं मूंग जैसी दलहनी फसलों के उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता में होगा सुधार, रासायनिक उर्वरकों पर घटेगी निर्भरता


अम्बिकापुर । इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल एवं निदेशक विस्तार डॉ. एस. एस. टुटेजा के निर्देशानुसार तथा कृषि विज्ञान केंद्र, सरगुजा के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. संदीप शर्मा के मार्गदर्शन में किसानों को हरित खाद (ग्रीन मैन्योरिंग) के उपयोग के प्रति जागरूक किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य टिकाऊ एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता में वृद्धि करना है।


कृषि विज्ञान केंद्र, सरगुजा द्वारा आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में क्षेत्र के बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को हरित खाद के वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक लाभों की जानकारी देते हुए बताया कि ढैंचा, सनई एवं मूंग जैसी दलहनी फसलों को 40 से 45 दिनों की अवस्था में खेत में पलटकर हरित खाद के रूप में उपयोग किया जाता है।


वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. संदीप शर्मा ने बताया कि ढैंचा, सनई एवं मूंग जैसी दलहनी फसलें राइजोबियम जीवाणुओं की सहायता से वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण कर लगभग 50 से 55 किलोग्राम नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर भूमि में उपलब्ध कराती हैं। इससे मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, जिसके परिणामस्वरूप मिट्टी की उर्वरता में वृद्धि होती है तथा रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता कम हो जाती है।


उन्होंने बताया कि हरित खाद के उपयोग से मिट्टी की संरचना में सुधार, जल धारण क्षमता में वृद्धि तथा लाभकारी सूक्ष्मजीवों की सक्रियता बढ़ती है। इससे फसल उत्पादन में वृद्धि होने के साथ-साथ भूमि की दीर्घकालीन उत्पादकता भी बनी रहती है। यह पद्धति किसानों के लिए कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने का प्रभावी एवं पर्यावरण अनुकूल विकल्प है।


कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से अपील की कि वे खरीफ फसलों की बुवाई से पूर्व अपने खेतों में हरित खाद का उपयोग अवश्य करें। इससे खेती की लागत कम होगी, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटेगी तथा मिट्टी का स्वास्थ्य बेहतर होगा। कार्यक्रम के अंत में किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया तथा उन्हें प्राकृतिक एवं टिकाऊ खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।


कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र, सरगुजा के वैज्ञानिक श्री पांडु राम पैकरा, डॉ. एस. पी. गुप्ता, डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार, डॉ. विवेक कुमार सांडिल्य, श्री लीलाधर साहू एवं श्री विरेंद्र कुमार सहित अन्य अधिकारी एवं किसान उपस्थित रहे।

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