टसर पालन से आत्मनिर्भरता की मिसाल, लगभग ढाई लाख रुपये की वार्षिक आमदनी



रायपुर । कोरबा जिले के ग्राम सलोरा निवासी 57 वर्षीय किसान भरत राम केवट ने टसर रेशम उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त कर आत्मनिर्भरता की मिसाल प्रस्तुत की है। सीमित संसाधनों और कृषि प्रधान परिवार में जन्मे श्री केवट ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद परिश्रम, लगन और वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल की है। टसर पालन उनके परिवार की आजीविका का सशक्त आधार बन चुका है। 

श्री केवट के पास एक एकड़ भूमि है, जिसमें वे खरीफ मौसम में धान की खेती करते हैं। 1980 के दशक में श्री केवट ने केंद्रीय रेशम बोर्ड के रामपुर स्थित प्रशिक्षण केंद्र से टसर पालन का विधिवत प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके पश्चात वे लगातार जागरूकता कार्यक्रमों से जुड़ते रहे। उन्होंने टसर पालन की संपूर्ण प्रक्रिया में स्वच्छता, चूना-ब्लीचिंग, नियमित निगरानी एवं रोगग्रस्त लार्वा के सुरक्षित निपटान जैसी वैज्ञानिक विधियों को अपनाया।


लगभग 33 वर्षों के अनुभव के आधार पर श्री केवट ने उच्च गुणवत्ता वाले टसर कोकून उत्पादन में विशिष्ट पहचान बनाई है। बीएसएमटीसी बिलासपुर से प्राप्त 145 डीएफएल के माध्यम से उन्होंने 10,000 बीज कोकून एवं 600 गैर-बीज कोकून का उत्कृष्ट उत्पादन किया, जो सामान्य उत्पादन दर से कहीं अधिक है। भविष्य में वे 500 डीएफएल पालन का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहे हैं।


टसर पालन से उन्हें वर्ष में दो फसलें प्राप्त होती हैं, जिससे लगभग ढाई लाख रुपये की वार्षिक आमदनी होती है। इसी आय से उन्होंने दो तालाब बनाकर अनुबंध आधारित मछली पालन भी प्रारंभ किया है। टसर पालन ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में बदलाव आया है। श्री केवट ने 8 से 10 किसानों को टसर पालन के लिए प्रेरित एवं प्रशिक्षित भी किया। उनके मार्गदर्शन में कई किसान आज सम्मानजनक आय अर्जित कर रहे हैं। उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ किसान का सम्मान भी मिला है। श्री भरत राम केवट का कहना है कि टसर पालन ने मेरी जिंदगी बदल दी है। इससे घर बना, बच्चों को पढ़ाया और परिवार को आगे बढ़ाया। अब दूसरों को मार्गदर्शन देना ही मेरे लिए सबसे बड़ा संतोष है।

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