ट्रंप का झटका कॉटन, सोयाबीन और इथेनॉल प्रोड्यूसर पर पड़ेगा; किसानों की टूटेगी कमर



-ट्रंप का झटका कॉटन, सोयाबीन और इथेनॉल प्रोड्यूसर पर पड़ेगा


मुंंबई। केंद्र सरकार का अमेरिका से खेती के इंपोर्ट को फ्री करने का फैसला सीधे तौर पर कॉटन, सोयाबीन और इथेनॉल प्रोड्यूसर पर पड़ेगा। अमेरिका से आने वाला इथेनॉल भारत में 45 रुपये प्रति लीटर तक मिलता है। वहीं, सोयाबीन का प्रोडक्शन वहां भारत से ज़्यादा होता है। जैसे-जैसे इथेनॉल और सोयाबीन की आवक बढऩे वाली है, यह तय है कि आने वाले दिनों में न सिफऱ् चीनी मिलों की कमर टूटेगी, बल्कि किसान भी बर्बाद हो जाएंगे। 


हालांकि अमेरिका ने अपनी इंपोर्ट ड्यूटी कम कर दी है, लेकिन उसने भारत को एक्सपोर्ट होने वाले खेती के प्रोडक्ट्स को फ्री कर दिया है। आमतौर पर, बादाम, पिस्ता, सेब, कॉटन, सोयाबीन तेल और इथेनॉल हर साल बड़ी मात्रा में अमेरिका से भारत में इंपोर्ट किए जाते हैं। अगर हम महाराष्ट्र की बात करें, तो इसका असर कॉटन, सोयाबीन तेल और इथेनॉल के पूरे मार्केट पर पड़ेगा। महाराष्ट्र में हर साल लगभग 125 करोड़ लीटर अनाज और गन्ने के रस से इथेनॉल बनता है।


 आम तौर पर, तेल कंपनियाँ अनाज से बना इथेनॉल 65 रुपये प्रति लीटर और गन्ने से बना इथेनॉल 58 रुपये प्रति लीटर के रेट पर खरीदती हैं। यूएस में ज़्यादातर इथेनॉल मक्के से बनता है। प्रोडक्शन कॉस्ट मिलाकर, यह भारत में 45 रुपये प्रति लीटर तक मिल सकता है। अगर इथेनॉल भारत से 13 से 20 रुपये प्रति लीटर सस्ता मिलता है, तो यहाँ की तेल कंपनियाँ इसे यूएस से बड़ी मात्रा में इम्पोर्ट कर सकती हैं। इससे यहाँ के इथेनॉल प्रोड्यूसर्स पर असर पड़ेगा।


यूएस में सोयाबीन का प्रोडक्शन दोगुना हुआ

पारंपरिक बीजों का इस्तेमाल करके, हम प्रति एकड़ सिफऱ् 12 से 13 क्विंटल सोयाबीन ही पैदा कर पाते हैं। लेकिन, यूएस में जीएम (जेनेटिकली मॉडिफाइड क्रॉप) बीज इस्तेमाल होते हैं, इसलिए कम प्रोडक्शन कॉस्ट पर प्रति एकड़ 23 से 25 क्विंटल सोयाबीन पैदा होता है।


रिकवर हो रही शुगर इंडस्ट्री फिर से मुश्किल में

  • -शुगर इंडस्ट्री थोड़ी रिकवर हुई थी क्योंकि पिछले दो सालों से घरेलू मार्केट में शुगर की कीमतें स्टेबल थीं।
  • -ज़्यादातर शुगर फैक्ट्रियों ने किसानों को गन्ने के बिल टाइम पर देना शुरू कर दिया है।
  • -लेकिन, अगर इथेनॉल की कीमतें गिरती हैं, तो इस इंडस्ट्री को फिर से दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।

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