मार्च अंत की विशेष तैयारी: सूखते जलस्तर के बीच 'वरदान' साबित होंगी ये फसलें



  • -कम लागत और नाममात्र सिंचाई में बंपर पैदावार का मौका
  • -किसानों के लिए कृषि विशेषज्ञों की नई सलाह

रायपुर/बेमेतरा। मार्च का अंतिम सप्ताह कृषि चक्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। जैसे-जैसे पारा चढ़ रहा है, सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। कृषि वैज्ञानिकों ने अब ऐसी फसलों और सब्जियों की सिफारिश की है जो न केवल भीषण गर्मी को सहन कर सकती हैं, बल्कि जिनमें पानी की खपत सामान्य फसलों के मुकाबले 40 से 50' तक कम होती है। इन 'शून्य जल' या 'अल्प जल' फसलों को अपनाकर किसान अपनी लागत घटाकर मुनाफा बढ़ा सकते हैं।

 मल्चिंग का प्रयोग:

 खेत की ऊपरी सतह को फसल अवशेषों या प्लास्टिक फिल्म से ढकें ताकि नमी न उड़े।

ड्रिप सिंचाई:

 बूंद-बूंद सिंचाई पद्धति अपनाएं, इससे 70त्न तक पानी की बचत होती है।

शाम को सिंचाई: 

वाष्पीकरण से बचने के लिए हमेशा सूर्योदय से पहले या सूर्यास्त के बाद ही पानी दें।

 आधुनिक खेती का दृश्य: 

एक हरा-भरा खेत जहां ड्रिप पाइप बिछे हों और किसान आधुनिक तकनीक से कम पानी वाली फसल (जैसे मूंग या बाजरा) की देखभाल कर रहा हो।


 


फसलें

  • मूंग
  • उड़द
  • तिल
  • लोबिया
  • मूंगफली


सब्जियां

  • भिंडी
  • लौकी
  • तोरई
  • करेला
  • खीरा

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