भू-जल स्तर की चिंता? कम पानी में लहलहाएंगी ये फसलें!



-किसान गर्मी की शुरुआत में मूंग, उड़द और तिल जैसी फसलों की खेती कर कम सिंचाई में भी अच्छी आमदनी ले सकते हैं

कृषि लाभ। न्यूज डेस्क

रायपुर। मार्च के अंत में इन कम पानी वाली फसलों और सब्जियों की बुआई कर किसान न केवल पानी बचा सकते हैं, बल्कि अच्छा मुनाफा भी कमा सकते हैं।

क्यों जरूरी है कम पानी वाली खेती?

भू-जल स्तर में गिरावट: लगातार भू-जल के अत्यधिक दोहन से जल स्तर नीचे जा रहा है, जिससे भविष्य के लिए जल संकट गहरा रहा है।

जलवायु परिवर्तन: अनियमित वर्षा और बढ़ते तापमान के कारण फसलों को ज्यादा पानी की जरूरत होती है।

लागत में कमी: कम पानी वाली फसलों में सिंचाई की लागत कम होती है, जिससे किसानों को ज्यादा लाभ होता है।

टिकाऊ खेती: कम पानी वाली खेती भविष्य के लिए टिकाऊ है, जिससे जल संसाधनों का संरक्षण होता है।


कम पानी वाली फसलें:


बाजरा: यह एक ऐसी फसल है जिसे बहुत कम पानी की आवश्यकता होती है। यह राजस्थान, हरियाणा, गुजरात जैसे शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में काफी प्रचलित है। बाजरे की कई किस्में उपलब्ध हैं, जिन्हें विभिन्न जलवायु परिस्थितियों के लिए अनुकूलित किया जा सकता है।

ज्वार: बाजरे की तरह ज्वार को भी कम पानी की आवश्यकता होती है। यह एक बहुउद्देश्यीय फसल है, जिसका उपयोग दाने और चारे के लिए किया जाता है। ज्वार की खेती भारत के कई राज्यों में की जाती है।

रागी: रागी, जिसे फिंगर मिलेट भी कहा जाता है, एक पौष्टिक फसल है जिसे कम पानी की आवश्यकता होती है। इसकी खेती मुख्य रूप से दक्षिण भारत में की जाती है, लेकिन अब उत्तर भारत में भी इसकी लोकप्रियता बढ़ रही है।


कम पानी वाली सब्जियां:

भिंडी: भिंडी एक ऐसी सब्जी है जिसे बहुत कम पानी की आवश्यकता होती है। इसकी खेती पूरे भारत में की जाती है और इसे गर्मियों के मौसम में भी उगाया जा सकता है।

तुरई: तुरई को भी कम पानी की आवश्यकता होती है और इसे गर्मियों में उगाया जा सकता है। यह एक पौष्टिक सब्जी है जिसे कई व्यंजनों में इस्तेमाल किया जा सकता है।

लौकी: लौकी भी कम पानी में उगाई जा सकती है। इसकी कई किस्में उपलब्ध हैं, जिन्हें विभिन्न जलवायु परिस्थितियों के लिए अनुकूलित किया जा सकता है।

करेला: करेला को भी कम पानी की आवश्यकता होती है। यह एक औषधीय सब्जी है जिसे कई बीमारियों के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।


अतिरिक्त सुझाव:

  • मल्चिंग: खेत में मल्चिंग करने से वाष्पीकरण कम होता है, जिससे मिट्टी में नमी बनी रहती है।
  • ड्रिप सिंचाई: ड्रिप सिंचाई तकनीक का उपयोग करके पानी की खपत को कम किया जा सकता है।
  • जैविक खाद: जैविक खाद का उपयोग करने से मिट्टी की जल धारण क्षमता बढ़ती है।


कम पानी वाली फसलें

मूंग, उड़द, तिल, लोबिया, मूंगफली, भिंडी कद्दू वर्गीय सब्जियां।

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