ज्वार की खेती: कम पानी में भरपूर पैदावार का भरोसा



-गर्मी और सूखे में भी लहलहाती फसल, किसानों के लिए फायदेमंद विकल्प


रायपुर। बढ़ती गर्मी और घटते जलस्तर के कारण किसान अब ऐसी फसलों की तलाश में हैं जो कम पानी में भी अच्छी पैदावार दे सकें। ज्वार की फसल इस दिशा में एक मजबूत विकल्प बनकर सामने आई है। गर्मी के मौसम में जल संकट किसानों के सामने बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे समय में ज्वार की फसल कम पानी में भी अच्छी पैदावार देने के कारण काफी लोकप्रिय हो रही है। ज्वार एक सूखा सहनशील फसल है, जिसे बहुत कम सिंचाई की आवश्यकता होती है।

 यह फसल गर्म जलवायु में भी आसानी से उग जाती है और लगभग 90 से 100 दिनों में तैयार हो जाती है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, ज्वार की खेती करने से किसानों को दोहरा लाभ मिलता है—एक ओर इससे अनाज प्राप्त होता है, वहीं दूसरी ओर इसका उपयोग पशुओं के चारे के रूप में भी किया जाता है। इसके अलावा, ज्वार की खेती में कीट और रोग कम लगते हैं, जिससे किसानों का खर्च भी कम होता है। सरकार भी मोटे अनाज (मिलेट्स) को बढ़ावा देने के लिए किसानों को प्रोत्साहित कर रही है।


ज्वार फसल की प्रमुख विशेषताएं:

  • - कम पानी में उगने वाली फसल
  • - सूखा सहनशील
  • - 90-100 दिनों में तैयार
  • - अनाज और चारे दोनों के लिए उपयोगी
  • - कम लागत, अधिक लाभ


विशेषज्ञ की राय: विशेषज्ञों का कहना है कि "ज्वार जैसी फसलें भविष्य की खेती के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं, खासकर उन क्षेत्रों में जहां पानी की कमी है।"

निष्कर्ष: गर्मी और पानी की कमी के इस दौर में ज्वार की खेती किसानों के लिए एक सुरक्षित और लाभदायक विकल्प साबित हो रही है। सही तकनीक और जानकारी के साथ किसान अपनी आय को बढ़ा सकते हैं।


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